50 प्रतिशत के अनुदान पर पपीते की खेती कर किसान कर सकते हैं लाखो की कमाई

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है | किसानों को बागवानी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय बागवानी विकास मिशन योजना के तहत विभिन्न बागवानी फसलों पर अनुदान दिया जाता है | छत्तीसगढ़ में राज्य के उद्यानिकी विभाग द्वारा केन्द्र पोषित राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना संचालित की जा रही है । योजना के घटक पपीता क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत कृषकों को अनुदान दिया जा रहा है इच्छुक किसान आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं |

पपीता उत्पादन एक महत्वपूर्ण व्यवसायिक फसल है। पपीते का व्यवसायिक प्रवर्धन बीज द्वारा किया जाता है। कृषक पपीते के पौधों को एक बार अपने क्षेत्र में लगाने के बाद 24 महीने तक फल प्राप्त कर सकते है। एक हेक्टेयर में रोपण हेतु लगभग 250-300 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। पपीते में पुष्प 5 माह के बाद आना प्रारंभ हो जाते है एवं 8वें महीने के बाद फल लगने प्रारंभ हो जाते है।

पपीता के फलों का जैम, जैली, नेक्टर, मार्मालेड, जूस, आइसक्रीम आदि बनाने में उपयोग किया जाता है। कच्चे फलों से पपैन निकाला जाता है, जिसका उपयोग च्वींगम, कॉस्मेटिक, डेंटल पेस्ट, दवाईयां आदि बनाने में किया जाता है। राज्य के किसान योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 2,777 पपीता के पौधे को रोपित कर प्रति पेड़ 40-50 फल तक उत्पादन ले रहे है। एक फल भार लगभग 0.5 किग्रा. से 3.0 किग्रा. तक होता है। पपीते के एक अच्छे बाग से औसतन 300-350 क्विंटल फल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष प्राप्त होता है। इस तरह किसान प्रति हेक्टेयर पपीते की खेती पर लगभग राशि 60 से 65 हजार रूपए राशि व्यय कर 5 से 6 लाख रूपए तक लाभ कमा सकते हैं।